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श्लोक 2.12.10  |
छिनत्ति वीरुधो यस्तु वीरुत्संस्थे निशाकरे।
पत्रं वा पातयत्येकं ब्रह्महत्यां स विन्दति॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| जो कोई अमावस्या के समय वृक्ष या लता आदि को काटता है अथवा उनका एक पत्ता भी तोड़ता है, वह ब्रह्महत्या का पाप करता है ॥10॥ |
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| Whoever cuts trees or creepers etc. during the period of the moon [on the new moon] or plucks even a leaf from them, commits the sin of killing a brahmin. ॥10॥ |
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