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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 11: सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन
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श्लोक 26
श्लोक
2.11.26
पक्षतृप्तिं तु देवानां पितॄणां चैव मासिकीम्।
शश्वत्तृप्तिं च मर्त्यानां मैत्रेयार्क: प्रयच्छति॥ २६॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! इस प्रकार सूर्यदेव देवताओं को पाक्षिक, पितरों को मासिक तथा मनुष्यों को प्रतिदिन तृप्त करते रहते हैं॥26॥
O Maitreya! In this way, Suryadev keeps satisfying the gods fortnightly, the ancestors monthly and the human beings daily. 26॥
इति श्रीविष्णुपुराणे द्वितीयेंऽशे एकादशोऽध्याय:॥ ११॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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