श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 11: सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.11.24 
आदत्ते रश्मिभिर्यन्तु क्षितिसंस्थं रसं रवि:।
तमुत्सृजति भूतानां पुष्टॺर्थं सस्यवृद्धये॥ २४॥
 
 
अनुवाद
सूर्य अपनी किरणों द्वारा पृथ्वी से जो जल खींचता है, उसे प्राणियों के पोषण तथा अन्न की वृद्धि के लिए बरसा देता है। 24.
 
All the water that the Sun draws from the Earth with its rays, he rains it down for the nourishment of living creatures and increase of food grains. 24.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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