श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 11: सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.11.22 
सूर्यरश्मि: सुषुम्णा यस्तर्पितस्तेन चन्द्रमा:।
कृष्णपक्षेऽमरै: शश्वत्पीयते वै सुधामय:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
सूर्य की सुषुम्ना नामक किरण शुक्ल पक्ष में चन्द्रमा को पुष्ट करती है और फिर कृष्ण पक्ष में देवतागण उस अमृतमय चन्द्रमा की प्रत्येक कला का निरन्तर पान करते हैं ॥22॥
 
The Sun's ray called Sushumna nourishes the Moon in the Shukla Paksha (bright fortnight). And then in the Krishna Paksha (dark fortnight), the gods continuously drink each and every phase of that nectar-like Moon. ॥22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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