| श्री विष्णु पुराण » अंश 2: द्वितीय अंश » अध्याय 11: सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन » श्लोक 21 |
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| | | | श्लोक 2.11.21  | पितृदेवमनुष्यादीन्स सदाप्याययन्प्रभु:।
परिवर्तत्यहोरात्रकारणं सविता द्विज॥ २१॥ | | | | | | अनुवाद | | हे द्विज! दिन और रात्रि के कारण भगवान सूर्य सदैव पितरों, देवताओं और मनुष्यों को तृप्त करते हुए विचरण करते हैं॥21॥ | | | | Hey Dwija! Lord Surya, the cause of day and night, always roams around satisfying the ancestors, gods and human beings. 21॥ | | ✨ ai-generated | | |
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