vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 2: द्वितीय अंश
»
अध्याय 11: सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन
»
श्लोक 21
श्लोक
2.11.21
पितृदेवमनुष्यादीन्स सदाप्याययन्प्रभु:।
परिवर्तत्यहोरात्रकारणं सविता द्विज॥ २१॥
अनुवाद
हे द्विज! दिन और रात्रि के कारण भगवान सूर्य सदैव पितरों, देवताओं और मनुष्यों को तृप्त करते हुए विचरण करते हैं॥21॥
Hey Dwija! Lord Surya, the cause of day and night, always roams around satisfying the ancestors, gods and human beings. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×