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श्लोक 2.11.19  |
स्तम्भस्थदर्पणस्येव योऽयमासन्नतां गत:।
छायादर्शनसंयोगं स तं प्राप्नोत्यथात्मन:॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| जो कोई भी स्तम्भ पर लगे दर्पण के पास जाता है, उसे अपना ही प्रतिबिम्ब दिखाई देने लगता है ॥19॥ |
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| Whoever goes near the mirror fixed on the pillar begins to see his own reflection. ॥ 19॥ |
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