श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 11: सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.11.19 
स्तम्भस्थदर्पणस्येव योऽयमासन्नतां गत:।
छायादर्शनसंयोगं स तं प्राप्नोत्यथात्मन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जो कोई भी स्तम्भ पर लगे दर्पण के पास जाता है, उसे अपना ही प्रतिबिम्ब दिखाई देने लगता है ॥19॥
 
Whoever goes near the mirror fixed on the pillar begins to see his own reflection. ॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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