श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 11: सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.11.15 
तया चाधिष्ठित: सोऽपि जाज्वलीति स्वरश्मिभि:।
तम: समस्तजगतां नाशं नयति चाखिलम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उसमें स्थित सूर्यदेव भी अपनी प्रखर किरणों से अत्यंत तेजस्वी हो जाते हैं और संसार के समस्त अंधकार का नाश कर देते हैं ॥15॥
 
The Sun God seated therein also becomes extremely radiant with his brilliant rays and destroys all darkness of the world. ॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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