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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 11: सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन
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श्लोक 14
श्लोक
2.11.14
एवं सा सात्त्विकी शक्तिर्वैष्णवी या त्रयीमयी।
आत्मसप्तगणस्थं तं भास्वन्तमधितिष्ठति॥ १४॥
अनुवाद
इस प्रकार वह त्रैमयी सात्विक वैष्णवी शक्ति अपने सप्तगणों में स्थित आदित्य में [अत्यंत] स्थित है ॥14॥
In this way, that Trimayi Satvik Vaishnavi Shakti is [extremely] situated in Aditya situated in its Saptganas. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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