श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 11: सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.11.12 
न केवलं रवे: शक्तिर्वैष्णवी सा त्रयीमयी।
ब्रह्माथ पुरुषो रुद्रस्त्रयमेतत्त्रयीमयम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यह त्रिदेवी वैष्णवी शक्ति केवल सूर्य की ही अधिष्ठात्री नहीं होनी चाहिए; अपितु ब्रह्मा, विष्णु और महादेव भी त्रिदेव ही हैं॥12॥
 
This trinity Vaishnavi power should not be the presiding deity of the Sun alone; Rather, Brahma, Vishnu and Mahadev are also trinity. 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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