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श्री विष्णु पुराण
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अंश 2: द्वितीय अंश
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अध्याय 11: सूर्यशक्ति एवं वैष्णवी शक्तिका वर्णन
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श्लोक 1
श्लोक
2.11.1
श्रीमैत्रेय उवाच
यदेतद्भगवानाह गण: सप्तविधो रवे:।
मण्डले हिमतापादे: कारणं तन्मया श्रुतम्॥ १॥
अनुवाद
श्री मैत्रेयजी बोले - हे प्रभु! मैंने आपकी बात सुनी है कि सूर्यमण्डल में सात गण शीत, ग्रीष्म आदि ऋतुओं के कारण होते हैं॥1॥
Sri Maitreya said - O Lord! I have heard what you said that the seven Ganas in the solar system are caused by winter, summer, etc.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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