श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 1: प्रियव्रतके वंशका वर्णन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.1.43 
एष स्वायम्भुव: सर्गो येनेदं पूरितं जगत्।
वाराहे तु मुने कल्पे पूर्वमन्वन्तराधिप:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे ऋषि! इस वराह कल्प में प्रथम मन्वन्तरधिप स्वायम्भुव मनु का वंश है, जो उस समय इस सम्पूर्ण जगत् में व्याप्त थे ॥ 43॥
 
O sage! In this Varaha Kalpa, this is the dynasty of the first Manvantaraadhipa Svayambhuva Manu, who at that time had pervaded this entire world. ॥ 43॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे द्वितीयेंऽशे प्रथमोऽध्याय:॥ १॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)