श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 1: प्रियव्रतके वंशका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.1.32 
ततश्च भारतं वर्षमेतल्लोकेषु गीयते।
भरताय यत: पित्रा दत्तं प्रातिष्ठता वनम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
पिता ऋषभदेवजी वन में जाते समय अपना राज्य भरतजी को दे गए थे; इसलिए तब से यह (हिमवर्ष) इस संसार में भारतवर्ष नाम से प्रसिद्ध हुआ॥32॥
 
Father Rishabhdevji had given his kingdom to Bharatji while going to the forest; Hence since then this (Himvarsha) became famous in this world by the name Bharatvarsha. 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)