श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 1: प्रियव्रतके वंशका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.1.30 
वानप्रस्थविधानेन तत्रापि कृतनिश्चय:।
तपस्तेपे यथान्यायमियाज स महीपति:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
महाराज ऋषभ ने वहाँ वानप्रस्थ-आश्रम के नियमानुसार निवास किया और दृढतापूर्वक तप किया तथा नियमानुसार यज्ञानुष्ठान किया ॥30॥
 
Maharaj Rishabh lived there as per the rules of Vanaprastha-Ashram and performed penance with determination and performed Yagya rituals as per the rules. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)