श्री विष्णु पुराण  »  अंश 2: द्वितीय अंश  »  अध्याय 1: प्रियव्रतके वंशका वर्णन  »  श्लोक 21-23
 
 
श्लोक  2.1.21-23 
श्वेतं तदुत्तरं वर्षं पित्रा दत्तं हिरण्वते॥ २१॥
यदुत्तरं शृङ्गवतो वर्षं तत्कुरवे ददौ।
मेरो: पूर्वेण यद्वर्षं भद्राश्वाय प्रदत्तवान‍्॥ २२॥
गन्धमादनवर्षं तु केतुमालाय दत्तवान‍्।
इत्येतानि ददौ तेभ्य: पुत्रेभ्य: स नरेश्वर:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
पिता आग्नीघ्र ने उसका उत्तराधिकारी श्वेतवर्ष हिरण्वान् को दिया और श्रृंगवान पर्वत के उत्तर में स्थित वर्ष कुरुको को दिया तथा मेरु के पूर्व में स्थित वर्ष भद्राश्व को दिया और गंधमादनवर्ष केतुमाल को दिया। इस प्रकार राजा आग्नीघ्र ने ये वर्ष अपने पुत्रों को दिए। 21-23॥
 
Father Agnidhra gave its successor Shwetavarsha to Hiranvan and the year which is situated to the north of Shringavan mountain to Kuruko and the one which is situated to the east of Meru to Bhadrashva and gave Gandhamadanavarsha to Ketumal. In this way King Agnidhra gave these years to his sons. 21-23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)