श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  1.9.92 
मथ्यमाने ततस्तस्मिन्क्षीराब्धौ देवदानवै:।
हविर्धामाऽभवत्पूर्वं सुरभि: सुरपूजिता॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जब देवताओं और दानवों ने क्षीरसागर का मन्थन किया, तब सबसे पहले देवताओं द्वारा पूजित कामधेनु उत्पन्न हुई, जो यज्ञों की आधारशिला थी ॥92॥
 
Thus, when the ocean of milk was churned by the gods and demons, there first arose Kamadhenu, worshipped by the gods, who was the support of the sacrificial offerings. ॥92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)