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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
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श्लोक 86
श्लोक
1.9.86
ते तस्य मुखनिश्वासवह्नितापहतत्विष:।
निस्तेजसोऽसुरा: सर्वे बभूवुरमितौजस:॥ ८६॥
अनुवाद
महाबली वासुकि के मुख से निकली हुई प्राणहीन अग्नि से झुलसकर समस्त राक्षस प्राणहीन हो गए ॥86॥
All the demons became lifeless after being scorched by the breathless fire emanating from the mouth of the mighty Vasuki. 86॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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