श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  1.9.80 
मथ्यमाने च तत्राब्धौ यत्समुत्पत्स्यतेऽमृतम्।
तत्पानाद‍्बलिनो यूयममराश्च भविष्यथ॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
समुद्र मंथन से जो अमृत निकलेगा उसे पीकर तुम बलवान और अमर हो जाओगे। 80.
 
By drinking the nectar that comes out after churning the ocean, you will become strong and immortal. 80.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)