श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 63-65
 
 
श्लोक  1.9.63-65 
एष ब्रह्मा सहास्माभि: सहरुद्रैस्त्रिलोचन:।
सर्वादित्यै: समं पूषा पावकोऽयं सहाग्निभि:॥ ६३ ॥
अश्विनौ वसवश्चेमे सर्वे चैते मरु द‍्ग णा:।
साध्या विश्वे तथा देवा देवेन्द्रश्चायमीश्वर:॥ ६४ ॥
प्रणामप्रवणा नाथ दैत्यसैन्यै: पराजिता:।
शरणं त्वामनुप्राप्ता: समस्ता देवतागणा:॥ ६५ ॥
 
 
अनुवाद
हे नाथ! हम लोगों सहित ये ब्रह्माजी, रुद्रों सहित भगवान शंकर, बारह आदित्यों सहित भगवान पूषा, अग्नियों सहित पावक और ये दोनों अश्विनीकुमार, आठों वसु, समस्त मरुद्गण, साध्यगण, विश्वेदेव और देवराज इन्द्र, ये सभी देवता दैत्य सेना से पराजित होकर बड़ी भक्ति से आपकी शरण में आये हैं॥63-65॥
 
Hey Nath! This Brahmaji along with us, Lord Shankar along with the Rudras, Lord Pusha along with the twelve Adityas, Pavak along with the Agnis and these two Ashwini Kumars, the eight Vasus, all the Marudgans, the Sadhyagans, Vishvedev and the Devraj Indra, all these gods, after being defeated by the demon army, have come to your refuge in great devotion. 63-65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)