श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  1.9.52 
न स्थूलं न च सूक्ष्मं यन्न विशेषणगोचरम्।
तत्पदं परमं विष्णो: प्रणमाम: सदाऽमलम्॥ ५२ ॥
 
 
अनुवाद
जो न स्थूल है, न सूक्ष्म, न किसी अन्य विशेषण का विषय है, वही भगवान विष्णु का सनातन शुद्ध परम धाम है। हम उन्हें नमस्कार करते हैं ॥ 52॥
 
He who is neither gross nor subtle, nor the subject of any other adjective, is the eternally pure supreme abode of Lord Vishnu. We offer our salutations to Him. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)