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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
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श्लोक 26
श्लोक
1.9.26
तत: प्रभृति नि:श्रीकं सशक्रं भुवनत्रयम्।
मैत्रेयासीदपध्वस्तं सङ्क्षीणौषधिवीरुधम्॥ २६ ॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! तभी से इन्द्र सहित तीनों लोक वृक्ष, लता आदि के सूख जाने से दरिद्र और नष्ट होने लगे।
O Maitreya! From then on, the three worlds including Indra's started becoming destitute and ruined due to the withering of trees, creepers etc.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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