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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन
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श्लोक 16
श्लोक
1.9.16
मद्दत्ता भवता यस्मात्क्षिप्ता माला महीतले।
तस्मात्प्रणष्टलक्ष्मीकं त्रैलोक्यं ते भविष्यति॥ १६ ॥
अनुवाद
अच्छा, चूँकि तुमने मेरी दी हुई माला पृथ्वी पर फेंक दी है, इसलिए तुम्हारे ये तीनों लोक भी शीघ्र ही क्षीण हो जाएँगे ॥16॥
Well, since you have thrown the garland given by me on the earth, therefore this three worlds of yours will also soon become destitute. ॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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