श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.9.14 
मया दत्तामिमां मालां यस्मान्न बहु मन्यसे।
त्रैलोक्यश्रीरतो मूढ विनाशमुपयास्यति॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
हे मूर्ख! तूने मेरी दी हुई माला का मूल्य नहीं समझा, इसलिए तेरा तीनों लोकों का धन नष्ट हो जाएगा॥14॥
 
O fool! You did not value the garland I gave you, so your wealth of the three worlds will be destroyed. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)