श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  1.9.139 
यश्च सायं तथा प्रात: स्तोत्रेणानेन मानव:।
मां स्तोष्यति न तस्याहं भविष्यामि पराङ्मुखी॥ १३९॥
 
 
अनुवाद
तथा जो मनुष्य प्रातः और सायं इस स्तोत्र से मेरा गुणगान करता है, मैं उससे कभी विमुख नहीं होऊँगा ॥139॥
 
And I will never turn away from any person who praises me with this hymn in the morning and evening. ॥ 139॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)