श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 9: दुर्वासाजीके शापसे इन्द्रका पराजय, ब्रह्माजीकी स्तुतिसे प्रसन्न हुए भगवान‍्का प्रकट होकर देवताओंको समुद्र-मन्थनका उपदेश करना तथा देवता और दैत्योंका समुद्र-मन्थन  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  1.9.136 
इन्द्र उवाच
वरदा यदि मे देवि वरार्हो यदि वाप्यहम्।
त्रैलोक्यं न त्वया त्याज्यमेष मेऽस्तु वर: पर:॥ १३६ ॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने कहा - हे देवि! यदि आप मुझे वर देना चाहती हैं और मैं भी वर पाने के योग्य हूँ तो पहला वर आपको मुझे यह देना चाहिए कि आप इन तीनों लोकों का कभी त्याग न करें॥136॥
 
Indra said - O Goddess! If you wish to grant me a boon and if I am also worthy of receiving a boon then the first boon you should give me is that you should never abandon this three worlds.॥ 136॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)