श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 8: रौद्र-सृष्टि और भगवान‍् तथा लक्ष्मीजीकी सर्वव्यापकताका वर्णन  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  1.8.34-35 
किं चातिबहुनोक्तेन सङ्क्षेपेणेदमुच्यते॥ ३४ ॥
देवतिर्यङ्मनुष्यादौ पुन्नामा भगवान‍्हरि:।
स्त्रीनाम्नी श्रीश्च विज्ञेया नानयोर्विद्यते परम्॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
और क्या कहना है ? संक्षेप में यही कहना चाहिए कि देवता, तिर्यक और मनुष्यों में पुरुष रूप भगवान हरि हैं और स्त्री रूप श्री लक्ष्मीजी हैं, इनसे परे दूसरा कोई नहीं है ॥34-35॥
 
What more needs to be said? In short, it should be said that among Gods, Tiryak and humans, the male form is Lord Hari and the female form is Shri Lakshmiji, there is no one else beyond them. 34-35॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे प्रथमेंऽशे अष्टमोऽध्याय:॥ ८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)