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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 8: रौद्र-सृष्टि और भगवान् तथा लक्ष्मीजीकी सर्वव्यापकताका वर्णन
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श्लोक 32
श्लोक
1.8.32
नदस्वरूपी भगवाञ्छ्रीर्नदीरूपसंस्थिता।
ध्वजश्च पुण्डरीकाक्ष: पताका कमलालया॥ ३२ ॥
अनुवाद
भगवान नदी हैं और श्रीजी नदी हैं। कमल-नयन भगवान ध्वज हैं और कमल-नयन देवी लक्ष्मी ध्वजा हैं ॥32॥
The Lord is the river and Shreeji is the river. The lotus-eyed Lord is the flag and the lotus-eyed Goddess Lakshmi is the banner. ॥32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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