श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 8: रौद्र-सृष्टि और भगवान‍् तथा लक्ष्मीजीकी सर्वव्यापकताका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.8.20 
इच्छा श्रीर्भगवान‍्कामो यज्ञोऽसौ दक्षिणा त्वियम्।
आज्याहुतिरसौ देवी पुरोडाशो जनार्दन:॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
भगवान् इच्छा हैं और देवी लक्ष्मी इच्छा हैं, वे यज्ञ हैं और यह दक्षिणा है, श्री जनार्दन पुरोडाश हैं और देवी लक्ष्मी अज्याहुति (घी की आहुति) हैं।॥20॥
 
The Lord is desire and Goddess Lakshmi is desire, He is the sacrifice and this is the dakshina, Sri Janardana is the purodash and Goddess Lakshmi is the ajyahuti (ghee offering).॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)