श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 7: मरीचि आदि प्रजापतिगण, तामसिक सर्ग, स्वायम्भुवमनु और शतरूपा तथा उनकी सन्तानका वर्णन  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  1.7.2-3 
ते सर्वे समवर्त्तन्त ये मया प्रागुदाहृता:।
देवाद्या: स्थावरान्ताश्च त्रैगुण्यविषये स्थिता:॥ २॥
एवंभूतानि सृष्टानि चराणि स्थावराणि च॥ ३॥
 
 
अनुवाद
देवताओंसे लेकर स्थावरपर्यन्त, जिनका वर्णन मैं पहले कर चुका हूँ, ये तीनों चर-अचर प्राणी इसी प्रकार उत्पन्न हुए ॥2-3॥
 
Starting from the demigods to the immobile beings whom I have described earlier, all the three-fold movable and immovable beings came into being in this manner. ॥2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)