vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 6: चातुर्वर्ण्य-व्यवस्था, पृथिवी-विभाग और अन्नादिकी उत्पत्तिका वर्णन
»
श्लोक 5
श्लोक
1.6.5
पद्भॺामन्या: प्रजा ब्रह्मा ससर्ज द्विजसत्तम।
तम: प्रधानास्ता: सर्वाश्चातुर्वर्ण्यमिदं तत॥ ५॥
अनुवाद
हे द्विजश्रेष्ठ! ब्रह्माजी ने अपने पैरों से एक अन्य प्रकार की प्रजा उत्पन्न की, जो अंधकार से युक्त थी। ये चार वर्ण हो गए।
O best of the two! Brahmaji created another kind of population from his feet, which was dominated by darkness. These became the four Varnas. 5.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×