| श्री विष्णु पुराण » अंश 1: प्रथम अंश » अध्याय 6: चातुर्वर्ण्य-व्यवस्था, पृथिवी-विभाग और अन्नादिकी उत्पत्तिका वर्णन » श्लोक 41-42 |
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| | | | श्लोक 1.6.41-42  | तामिस्रमन्धतामिस्रं महारौरवरौरवौ।
असिपत्रवनं घोरं कालसूत्रमवीचिकम्॥ ४१ ॥
विनिन्दकानां वेदस्य यज्ञव्याघातकारिणाम्।
स्थानमेतत्समाख्यातं स्वधर्मत्यागिनश्च ये॥ ४२॥ | | | | | | अनुवाद | | तामिस्र, अन्धतामिस्र, महारौरव, रौरव, असिपत्रवन, घोर, कालसूत्र और अविचिक आदि नरक वेदों की निन्दा करने वाले, यज्ञों का नाश करने वाले तथा धर्म से विमुख रहने वालों के स्थान कहे गए हैं ॥41-42॥ | | | | The hells like Tamisra, Andhatamisra, Maharaurava, Raurava, Asipatravan, Ghor, Kaalsutra and Avichika etc., are said to be the places of those who criticize the Vedas and destroy the Yagyas and those who deviate from their religion. 41-42॥ | | | | इति श्रीविष्णुपुराणे प्रथमेंऽशे षष्ठोऽध्याय:॥ ६॥ | | | | ✨ ai-generated | | |
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