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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 6: चातुर्वर्ण्य-व्यवस्था, पृथिवी-विभाग और अन्नादिकी उत्पत्तिका वर्णन
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श्लोक 34
श्लोक
1.6.34
प्राजापत्यं ब्राह्मणानां स्मृतं स्थानं क्रियावताम्।
स्थानमैन्द्रं क्षत्रियाणां संग्रामेष्वनिवर्तिनाम्॥ ३४ ॥
अनुवाद
कर्मठ ब्राह्मणों का स्थान पितृलोक है, युद्धभूमि से कभी न हटने वाले क्षत्रियों का स्थान इन्द्रलोक है ॥34॥
The place of diligent Brahmins is Pitrulok, the place of Kshatriyas who never move away from the battlefield is Indralok. 34॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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