श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 6: चातुर्वर्ण्य-व्यवस्था, पृथिवी-विभाग और अन्नादिकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.6.30 
वेदवादांस्तथा वेदान‍्यज्ञकर्मादिकं च यत्।
तत्सर्वं निन्दयामासुर्यज्ञव्यासेधकारिण:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
उन यज्ञ विरोधियों ने वैदिक मान्यता, वेद और यज्ञ कर्मकाण्ड की निन्दा की है ॥30॥
 
Those opponents of Yagya have condemned the Vedic belief, the Vedas and the Yagya rituals. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)