vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 6: चातुर्वर्ण्य-व्यवस्था, पृथिवी-विभाग और अन्नादिकी उत्पत्तिका वर्णन
»
श्लोक 17
श्लोक
1.6.17
तासु क्षीणास्वशेषासु वर्द्धमाने च पातके।
द्वन्द्वाभिभवदु:खार्तास्ता भवन्ति तत: प्रजा:॥ १७॥
अनुवाद
इन सब सिद्धियों के क्षीण होने और पापों के बढ़ने से सम्पूर्ण प्रजा कलह, हानि और दुःख से व्याकुल हो गई ॥17॥
With all these accomplishments diminishing and sins increasing, the entire population became troubled with conflict, loss and misery. ॥17॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd