श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 6: चातुर्वर्ण्य-व्यवस्था, पृथिवी-विभाग और अन्नादिकी उत्पत्तिका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.6.16 
तत: सा सहजा सिद्धिस्तासां नातीव जायते।
रसोल्लासादयश्चान्या: सिद्धयोऽष्टौ भवन्ति या:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तब से उसे विष्णु पद तथा आनन्द आदि आठ सिद्धियाँ प्राप्त होने की स्वाभाविक सिद्धि नहीं मिलती ॥16॥
 
From then on he does not get the natural accomplishment of attaining the position of Vishnu and the eight siddhis* like the bliss of joy etc. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)