प्रजास्ताब्रह्मणासृष्टाश्चातुर्वर्ण्यव्यवस्थिता:।
सम्यक्छ्रद्धासमाचारप्रवणा मुनिसत्तम॥ ११ ॥
यथेच्छावासनिरता: सर्वबाधाविवर्जिता:।
शुद्धान्त:करणा: शुद्धा: कर्मानुष्ठाननिर्मला:॥ १२ ॥
अनुवाद
हे मुनिसतम! ब्रह्माजी द्वारा रचित चातुर्वर्ण्य-विभाग में स्थित लोग बड़े ही धर्मनिष्ठ, स्वेच्छाचारी, समस्त बाधाओं से रहित, शुद्ध अन्तःकरण वाले, उत्तम कुलों में उत्पन्न और पुण्यकर्मों से अत्यन्त पवित्र थे। 11-12॥
Hey Munisatam! The people situated in the Chaturvarnya-department, created by Lord Brahma, were very devout in conduct, lived as per their own free will, were free from all obstacles, had a pure conscience, were born in good families and were extremely pure by performing virtuous deeds. 11-12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥