श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  1.5.62 
इन्द्रियार्थेषु भूतेषु शरीरेषु च स प्रभु:।
नानात्वं विनियोगं च धातैवं व्यसृजत्स्वयम्॥ ६२ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार इन्द्रियाँ, भूत, शरीर आदि में भी भगवान् ने ही विविधता और व्यवहार उत्पन्न किया है ॥62॥
 
In this way, the Lord Creator himself has created diversity and behavior in the senses, ghost, body etc. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)