vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन
»
श्लोक 62
श्लोक
1.5.62
इन्द्रियार्थेषु भूतेषु शरीरेषु च स प्रभु:।
नानात्वं विनियोगं च धातैवं व्यसृजत्स्वयम्॥ ६२ ॥
अनुवाद
इस प्रकार इन्द्रियाँ, भूत, शरीर आदि में भी भगवान् ने ही विविधता और व्यवहार उत्पन्न किया है ॥62॥
In this way, the Lord Creator himself has created diversity and behavior in the senses, ghost, body etc. 62॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×