श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन  »  श्लोक 51-52
 
 
श्लोक  1.5.51-52 
गौरज: पुरुषो मेषश्चाश्वाश्वतरगर्दभा:।
एता न‍् ग्राम्या न‍् पशूनाहुरारण्यांश्च निबोध मे॥ ५१ ॥
श्वापदा द्विखुरा हस्ती वानरा: पक्षिपञ्चमा:।
औदका: पशव: षष्ठा: सप्तमास्तु सरीसृपा:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
गाय, बकरी, मनुष्य, भेड़, घोड़े, खच्चर और गधे ये सभी गाँवों में रहने वाले पशु हैं। जंगली पशु ये हैं- दो खुर वाले पशु (बाघ आदि), हाथी, बंदर, पाँचवें पक्षी, छठे जलचर और सातवें सरीसृप आदि हैं॥ 51-52॥
 
Cows, goats, men, sheep, horses, mules and donkeys are all animals living in villages. Wild animals are these- animals with two hoofs (tigers etc.), elephants, monkeys and the fifth are birds, the sixth are aquatic animals and the seventh are reptiles etc.॥ 51-52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)