श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.5.47 
एतानि सृष्ट्वा भगवा न‍् ब्रह्मा तच्छक्तिचोदित:।
तत: स्वच्छन्दतोऽन्यानि वयांसि वयसोऽसृजत्॥ ४७ ॥
 
 
अनुवाद
इन सबकी रचना करके ब्रह्माजी ने अपने पूर्वकर्मों से प्रेरित होकर अपनी आयु से पक्षियों की स्वतन्त्रतापूर्वक सृष्टि की ॥47॥
 
After creating all these, Lord Brahma, inspired by his previous deeds, freely created the birds from his age. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)