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श्री विष्णु पुराण
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अंश 1: प्रथम अंश
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अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन
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श्लोक 41
श्लोक
1.5.41
रजोमात्रात्मिकामेव ततोऽन्यां जगृहे तनुम्।
तत: क्षुद् ब्रह्मणो जाता जज्ञे कामस्तया तत:॥ ४१ ॥
अनुवाद
तब ब्रह्माजी ने दूसरा रजोमात्र शरीर धारण किया। उससे ब्रह्माजी ने भूख उत्पन्न की और भूख से काम उत्पन्न हुआ॥ 41॥
Then Brahmaji assumed another body of Rajomatram. Through that Brahmaji generated hunger and from hunger, lust was generated.॥ 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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