श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.5.40 
ज्योत्स्ना रात्र्यहनी सन्ध्या चत्वार्येतानि वै प्रभो:।
ब्रह्मणस्तु शरीराणि त्रिगुणोपाश्रयाणि तु॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार रात्रि, दिन, प्रातः और सायंकाल, ये चारों ब्रह्माजी के शरीर हैं और तीनों गुणों के निवास स्थान हैं ॥40॥
 
Thus night, day, morning and evening, these four are the body of Lord Brahma and are the abode of the three Gunas. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)