श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.5.21 
इत्येष प्राकृत: सर्ग: सम्भूतो बुद्धिपूर्वक:।
मुख्यसर्गश्चतुर्थस्तु मुख्या वै स्थावरा: स्मृता:॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
यह प्राकृतिक सृष्टि बुद्धि की सहायता से रची गई है। यह चौथी मुख्य सृष्टि है। इस मुख्य सृष्टि के अंतर्गत केवल पर्वत, वृक्ष आदि अचल वस्तुएं ही आती हैं ॥21॥
 
This natural creation was created with the help of wisdom. This is the fourth main creation. Only immovable things like mountains, trees etc. come under the main creation. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)