vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 1: प्रथम अंश
»
अध्याय 5: अविद्यादि विविध सर्गोंका वर्णन
»
श्लोक 19
श्लोक
1.5.19
इत्येते कथिता: सर्गा: षडत्र मुनिसत्तम।
प्रथमो महत: सर्गो विज्ञेयो ब्रह्मणस्तु स:॥ १९ ॥
अनुवाद
हे महामुनि! अब तक मैंने आपसे छः स्कन्ध कहे हैं। उनमें महत्तत्त्व को ब्रह्मा का प्रथम स्कन्ध जानना चाहिए। 19॥
Oh great sage! Thus far I have told you six cantos. Among them, Mahatattva should be known as the first canto of Brahma. 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×