श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान‍्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.4.46 
तस्योपरि जलौघस्य महती नौरिव स्थिता।
विततत्वात्तु देहस्य न मही याति सम्प्लवम्॥ ४६ ॥
 
 
अनुवाद
वह जल पर विशाल नाव के समान पड़ा रहता है, और अपने विशाल आकार के कारण डूबता नहीं है ॥46॥
 
It lies like a huge boat upon the water, and due to its spacious shape it does not sink. ॥46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)