श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान‍्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.4.43 
सत्त्वोद्रिक्तोऽसि भगवन् गोविन्द पृथिवीमिमाम्।
समुद्धर भवायेश शन्नो देह्यब्जलोचन॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! हे गोविन्द! इस समय आप सत्वगुण से युक्त हैं; अतः हे प्रभु! जगत् की रचना के लिए इस पृथ्वी का उद्धार कीजिए और हे कमलनेत्र! हमें शांति प्रदान कीजिए ॥ 43॥
 
O Lord! O Govind! At this time you are dominated by Sattva; therefore, O Lord! For the creation of the world, please redeem this earth and O lotus-eyed one! Please give us peace. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)