श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान‍्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.4.42 
प्रसीद सर्व सर्वात्मन्वासाय जगतामिमाम्।
उद्धरोर्वीममेयात्मञ्छन्नो देह्यब्जलोचन॥ ४२ ॥
 
 
अनुवाद
हे सब लोग! हे परमात्मा! प्रसन्न हो जाओ। हे अप्रमेयात्मा! हे कमल! संसार के निवास के लिए पृथ्वी का उद्धार करके हमें शांति प्रदान करो। 42॥
 
Hey all! Oh Supreme Soul! Be happy. O Aparmeyaatman! O lotus flower! Provide us peace by saving the earth for the habitation of the world. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)