श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान‍्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.4.38 
परमार्थस्त्वमेवैको नान्योऽस्ति जगत: पते।
तवैष महिमा येन व्याप्तमेतच्चराचरम्॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
हे जगत के स्वामी! आप ही परम सत्य (सत्य) हैं, आपके अतिरिक्त अन्य कोई नहीं है। आपकी ही महिमा (माया) इस सम्पूर्ण चराचर जगत में व्याप्त है ॥ 38॥
 
O Lord of the world! You alone are the ultimate truth (truth), there is no one else besides you. It is your glory (illusion) that pervades this entire animate and inanimate world. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)