श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान‍्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.4.35 
पदक्रमाक्रान्तभुवं भवन्त-
मादिस्थितं चाक्षर विश्वमूर्ते।
विश्वस्य विद्म: परमेश्वरोऽसि
प्रसीद नाथोऽसि परावरस्य॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे अक्षर! हे ब्रह्माण्ड के स्वरूप! हम आपको ब्रह्माण्ड का मूल कारण मानते हैं, जो अपने चरणों से पृथ्वी को ढक लेते हैं। आप सम्पूर्ण चराचर जगत के परमेश्वर और स्वामी हैं; अतः आप प्रसन्न हों ॥35॥
 
O Akshar! O image of the universe! We consider you to be the root cause of the universe, who covers the earth with your foot strikes. You are the Supreme Lord and master of the entire animate and inanimate world; therefore, be pleased. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)