हे महात्मन! रात्रि और दिन आपके नेत्र हैं और सबका आधार परब्रह्म आपका मस्तक है। हे प्रभु! वैष्णव सूक्त आदि सभी आपके शतकल्प (कंधों के बाल) हैं और समस्त हवि आपके प्राण हैं॥ 33॥
O great soul! Night and day are your eyes and the basis of all is the Supreme Brahman, your head. O Lord! All the Vaishnava Suktas, etc., are your Sataklapa (hairs on the shoulders) and all the offerings are your life.॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥