श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान‍्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.4.3 
अतीतकल्पावसाने निशासुप्तोत्थित: प्रभु:।
सत्त्वोद्रिक्तस्तथा ब्रह्मा शून्यं लोकमवैक्षत॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पिछले कल्प के अन्त में जब भगवान ब्रह्मा रात्रि में निद्रा से जागे, तो सत्त्वगुण से परिपूर्ण होकर उन्होंने सम्पूर्ण लोकों को शून्य देखा॥3॥
 
At the end of the last Kalpa, when Lord Brahma woke up from sleep at night, filled with the essence of Sattva Guna, he saw all the worlds void. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)