श्री विष्णु पुराण  »  अंश 1: प्रथम अंश  »  अध्याय 4: ब्रह्माजीकी उत्पत्ति वराहभगवान‍्द्वारा पृथिवीका उद्धार और ब्रह्माजीकी लोक-रचना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.4.21 
जयाखिलज्ञानमय जय स्थूलमयाव्यय।
जयाऽनन्त जयाव्यक्त जय व्यक्तमय प्रभो॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे सर्वज्ञ! हे स्थूल! हे अविनाशी! आपकी जय हो। हे अनंत! हे अव्यक्त! हे व्यक्त प्रभु! आपकी जय हो।॥21॥
 
O all-knowing! O gross! O indestructible! Victory to you. O infinite! O unmanifest! O manifested Lord! Victory to you.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)